Category: कहानी

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मुझसे कह कर तो जाते

जीवन में ऐसे क्षण कभी-कभी ही आते हैं जब ऐसी तृप्ति महसूस होती है, बड़ी तृप्ति। छोटी-छोटी तृप्तियों की तो गिनती करना भी संभव नहीं हो पाता जो रोज़ ही महसूस होती हैं। जैसे...

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अक्स

सब लोग मुझे ‘स्पॉइल्ड चाइल्ड’ कहते हैं पर मेरा दावा है कि मैं नहीं, मेरी नानी ‘स्पॉइल्ड नानी’ हैं, ‘प्राब्लम नानी’ हैं। कोई भी मेरी आपबीती सुने तो उसे पता चले कि सचमुच मेरी...

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हाशिये से बाहर

वे बहुत खुश थीं, इतनी कि वह खुशी पिलकते-पिलकते बाहर आ रही थी। रियूनियन का संदेश जब मिला तो बीते जमाने के सारे साथियों की धुंधली तस्वीरें सामने आने लगीं। उन तस्वीरों के साथ...

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इलायची

शौकत मियाँ को सब प्यार और सम्मान से शौकी चाचा कहते थे। वे पान बहुत खाते थे। पान के स्वाद से बता देते थे कि कौन सा पत्ता है बंगाली, मद्रासी या कलकतिया। मुँह...

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अम्मी और मम्मी

(भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता की मासिक पत्रिका ‘वागर्थ’ के अक्तूबर अंक में प्रकाशित कहानी) वे दोनों सातवीं कक्षा में मिली थीं, जब दोनों अपने-अपने देश से आई थीं न्यूयॉर्क के फ्लशिंग हाईस्कूल में। वह स्कूल...